अष्टगति: ग्रह की आठ शास्त्रीय गतियाँ, और चेष्टा बल.
ज्योतिष प्रत्येक ग्रह की गति को आठ नामित अवस्थाओं में बाँटता है—पूर्ण वक्री से लेकर सामान्य औसत गति तक—और इसी वर्गीकरण से चेष्टा बल बनता है, जो षड्बल का एक अंग है। इस लेख में बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार इन आठों अवस्थाओं का मूल्य, फलदीपिका और सारावली के अनुसार इनका अर्थ, तथा चार समकालीन ज्योतिषियों की व्याख्या दी गई है।
तन्त्र में ज्योतिष: ज्योतिष और तन्त्र का वास्तविक संबंध
भूमिका अधिकांश अभ्यासरत ज्योतिषियों से पूछें कि तन्त्र, ज्योतिष में कहाँ फिट बैठता है, तो जवाब लगभग एक जैसा मिलेगा — उपाय (remedies)। दुर्बल ग्रह के लिए यन्त्र, पीड़ित भाव के लिए मन्त्र, हठी दोष के लिए हवन। यह उत्तर गलत नहीं है, पर यह एक बहुत पुराने और कहीं अधिक रोचक संबंध की केवल ऊपरी सतह है — एक ऐसा संबंध जहाँ ज्योतिष और तन्त्र साथ-साथ विकसित हुए, एक-दूसरे की तकनीक निरंतर उधार लेते रहे, और कुछ बिंदुओं पर एक ही मूल ग्रंथ को साझा करते हैं।
भावात् भावम्: 'घर से घर' का असली अर्थ, और क्या यह वास्तव में पाराशरी सिद्धांत है
भावात् भावम् (Bhavat Bhavam) — किसी भाव के सूक्ष्म अर्थ को समझने की यह प्रसिद्ध पद्धति कैसे काम करती है, क्या यह वास्तव में शास्त्रीय पाराशरी ग्रंथों से आती है, प्रतिष्ठित ज्योतिषी इसे किस दृष्टि से देखते हैं, और पाराशरी पद्धति में इसके क्या-क्या विकल्प पहले से उपलब्ध हैं — इस पर एक विस्तृत लेख।
वर्ग कुण्डलियों में तात्कालिक मैत्री: राशि कुण्डली से लें या स्वयं वर्ग से?
वर्ग कुण्डली में ग्रह की अनुकूलता (Dignity) उसकी तात्कालिक मैत्री पर निर्भर करती है—किन्तु वह मैत्री राशि कुण्डली में नापी जाए या स्वयं वर्ग कुण्डली में? अर्न्स्ट विल्हेम कहते हैं—सदैव राशि कुण्डली में। अधिकांश आधुनिक सॉफ़्टवेयर उसे प्रत्येक वर्ग में पुनः गणना करते हैं। हमने दोनों विधियों को बी. वी. रमन के प्रकाशित सप्तवर्गज बल पर परखा, और एक विधि 49 के 49 खानों में मेल खाती है।
अयन बल: एक ही गणना की दो विधियाँ (शास्त्रीय क्रांति-सारणी बनाम आधुनिक त्रिकोणमिति)
अयन बल (Ayana Bala) ग्रह की उत्तर या दक्षिण क्रांति से प्राप्त शक्ति को मापता है। इसकी गणना की दो मान्य विधियाँ हैं—शास्त्रीय क्रांति-सारणी और आधुनिक त्रिकोणमिति। इस लेख में दोनों विधियों को सरल भाषा में समझाया गया है, यह बताया गया है कि शास्त्रों में 24 अंश क्यों लिया गया है, और एक वास्तविक कुंडली पर विनायक होरा तथा जगन्नाथ होरा के परिणामों की तुलना की गई है।
नतोन्नत बल को सरल भाषा में समझें: ग्रहों का दिन–रात्रि बल और दो सॉफ़्टवेयर अलग परिणाम क्यों देते हैं
नतोन्नत बल (Natonnata Bala) को सरल भाषा में समझाने वाला यह लेख बताता है कि दिन और रात के अनुसार ग्रहों की शक्ति कैसे बदलती है। इसमें एक वास्तविक जन्मकुंडली के माध्यम से चरण-दर-चरण गणना समझाई गई है और यह भी बताया गया है कि विनायक होरा और जगन्नाथ होरा इसके अलग-अलग मान क्यों दिखाते हैं।
दुनिया की परिक्रमा की एक अद्भुत यात्रा!
माउंट कैलाश पर, जो भगवान शिव और देवी पार्वती का दिव्य धाम है, उनके दो पुत्र—कार्तिकेय और गणेश—देवताओं की साक्षी में बड़े हो रहे थे।
भगवान गणेश को सबसे पहले क्यों पूजते हैं — एक वैदिक दृष्टिकोण
भूमिका वैदिक और शास्त्रीय दृष्टिकोण से भगवान गणेश की प्रथम-पूजा का कारण पौराणिक कथाएँ नहीं, बल्कि वैदिक यज्ञ-तंत्र, ब्रह्म-विचार और ब्रह्मांडीय व्यवस्था है। वेदों में जिस देवता को बाद में गणेश कहा गया, वह मूल रूप से गणपति / ब्रह्मणस्पति के रूप में प्रतिष्ठित हैं — जो वाणी, मंत्र, यज्ञ और व्यवस्था के अधिष्ठाता हैं।







